Monday, 22 February 2021

सफल होने की पहली शर्त: उड़ चल अकेला । Psycho Life Gyan

Psycho Life Gyan


     



"चल उड़ चल हारिल ,चल उड़ हारिल ,  चल उड़ चल हारिल लिए हाथ में यही अकेला छोटा तिनका।" - अज्ञेय

हो सकता है शुरुआत में आपको कुछ हाथ ना आए लेकिन शुरुआत तो ऐसे ही होती है। एप्पल कंपनी की शुरुआत 11 से हुई, फेसबुक हॉस्टल के रूम में बनाया गया, टेस्ला और स्पेस एक्स भी एक छोटे से रूम से ही शुरू हुए। 


बात यह है कि आपको शुरु में अकेले ही चलना पड़ेगा। वह कहते हैं ना कि "चले थे मंजिलें अकेले ही गालिब, के लोग मिलते गए, कारवां बढ़ता गया" तो आप की महानता इस पर नहीं है कि आप बहुत आगे तक गए बड़ी बात यह है कि आपने शुरुआत की और बहुत छोटी जगह से, सीमित संसाधनों के साथ, आपने अपने ऊपर विश्वास किया और कूद गए लहरों से टकराने के लिए । 


"लहरों से डर के नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। "


जहां तक बात है मानसिकता की सारी बात तो वहीं से शुरू होती है खुद पर विश्वास हो । खुद से ही अगर कह सकते हो कि मुझे फर्क नहीं पड़ता कि कोई भी परिस्थिति हो, मैं हार नहीं मानूंगा क्योंकि मुझे विश्वास है कि मैं हर परिस्थिति को हैंडल कर सकता हूं।  एक तरीका काम ना आए तो दूसरे तरीके से मैं आगे बढूंगा और मेरा आगे बढ़ना हमेशा सत्य के लिए होगा।


जिस प्रकार भोर होते ही पशु पक्षी अपने घोंसले और ग घरों से निकलते हैं उसी प्रकार हर सुबह एक पथिक की भांति उसके लिए चलो जिसके लिए तुम बने हो और रस्ते को छोड़ना तुम्हारा धर्म नहीं है । वही त्यागना जो तुम्हारे लिए ना हो या जिसके लिए तुम ना हो अन्यथा तुम्हारे हाथ कुछ ना आएगा और तुम केवल निराश होओगे।

पहला कदम बढ़ाओ वहां तक चलो जहां तक प्रकाश है, आगे का प्रकाश वहां से दिखेगा, जब कहीं फंस जाओ तो किधर भी चले जाओ उधर जाकर ही तो पता चलेगा कि हम सही आए हैं या गलत है। 


Youths Guru

Author & Editor

Psychology Ambassador

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